Essay On Mumbai City In Hindi

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुम्बई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है।[2] इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है।

मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है।[3] यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है।[4] मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है।[5] भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दीचलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है।[6]

उद्गम[संपादित करें]

"मुंबई" नाम दो शब्दों से मिलकर बना है, मुंबा या महा-अंबा  – हिन्दू देवीदुर्गा का रूप, जिनका नाम मुंबा देवी है  – और आई, "मां" को मराठी में कहते हैं।[7] पूर्व नाम बाँम्बे या बम्बई का उद्गम सोलहवीं शताब्दी से आया है, जब पुर्तगाली लोग यहां पहले-पहल आये, व इसे कई नामों से पुकारा, जिसने अन्ततः बॉम्बे का रूप लिखित में लिया। यह नाम अभी भी पुर्तगाली प्रयोग में है। सत्रहवीं शताब्दी में, ब्रिटिश लोगों ने यहां अधिकार करने के बाद, इसके पूर्व नाम का आंग्लीकरण किया, जो बॉम्बे बना। किन्तु मराठी लोग इसे मुंबई या मंबई व हिन्दी व भाषी लोग इसे बम्बई ही बुलाते रहे।[8][9] इसका नाम आधिकारिक रूप से सन 1995 में मुंबई बना।

बॉम्बे नाम मूलतः पुर्तगाली नाम से निकला है, जिसका अर्थ है "अच्छी खाड़ी" (गुड बे)[10] यह इस तथ्य पर आधारित है, कि बॉम का पुर्तगाली में अर्थ है अच्छा, व अंग्रेज़ी शब्द बे का निकटवर्ती पुर्तगाली शब्द है बैआ। सामान्य पुर्तगाली में गुड बे (अच्छी खाड़ी) का रूप है: बोआ बहिया, जो कि गलत शब्द बोम बहिया का शुद्ध रूप है। हां सोलहवीं शताब्दी की पुर्तगाली भाषा में छोटी खाड़ी के लिये बैम शब्द है।

अन्य सूत्रों का पुर्तगाली शब्द बॉम्बैम के लिये, भिन्न मूल है। José Pedro Machado's Dicionário Onomástico Etimológico da Língua Portuguesa ("एटायमोलॉजी एवं ओनोमैस्टिक्स का पुर्तगाली शब्दकोष") बताता है, कि इस स्थान का १५१६ से प्रथम पुर्तगाली सन्दर्भ क्या है, बेनमजम्बु या तेन-माइयाम्बु,[11] माइआम्बु या "MAIAMBU"' मुंबा देवी से निकला हुआ लगता है। ये वही मुंबा देवी हैं, जिनके नाम पर मुंबई नाम मराठी लोग लेते हैं। इसी शताब्दी में मोम्बाइयेन की वर्तनी बदली (१५२५)[12] और वह मोंबैएम बना (१५६३)[13] और अन्ततः सोलहवीं शताब्दी में बोम्बैएम उभरा, जैसा गैस्पर कोर्रेइया ने लेंडास द इंडिया ("लीजेंड्स ऑफ इंडिया") में लिखा है।[14][15]

इतिहास[संपादित करें]

मुख्य लेख : मुंबई का इतिहास

कांदिवली के निकट उत्तरी मुंबई में मिले प्राचीन अवशेष संकेत करते हैं, कि यह द्वीप समूह पाषाण युग से बसा हुआ है। मानव आबादी के लिखित प्रमाण २५० ई.पू तक मिलते हैँ, जब इसे हैप्टानेसिया कहा जाता था। तीसरी शताब्दी इ.पू. में ये द्वीपसमूह मौर्य साम्राज्य का भाग बने, जब बौद्धसम्राटअशोक महान का शासन था। कुछ शुरुआती शताब्दियों में मुंबई का नियंत्रण सातवाहन साम्राज्य व इंडो-साइथियन वैस्टर्न सैट्रैप के बीच विवादित है। बाद में हिन्दू सिल्हारा वंश के राजाओं ने यहां १३४३ तक राज्य किया, जब तक कि गुजरात के राजा ने उनपर अधिकार नहीं कर लिया। कुछ पुरातन नमूने, जैसे ऐलीफैंटा गुफाएं व बालकेश्वर मंदिर में इस काल के मिलते हैं।

१५३४ में, पुर्तगालियों ने गुजरात के बहादुर शाह से यह द्वीप समूह हथिया लिया। जो कि बाद में चार्ल्स द्वितीय, इंग्लैंड को दहेज स्वरूप दे दिये गये।[17] चार्ल्स का विवाह कैथरीन डे बर्गैन्ज़ा से हुआ था। यह द्वीपसमूह १६६८ में, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को मात्र दस पाउण्ड प्रति वर्ष की दर पर पट्टे पर दे दिये गये। कंपनी को द्वीप के पूर्वी छोर पर गहरा हार्बर मिला, जो कि उपमहाद्वीप में प्रथम पत्तन स्थापन करने के लिये अत्योत्तम था। यहां की जनसंख्या १६६१ की मात्र दस हजार थी, जो १६७५ में बढ़कर साठ हजार हो गयी। १६८७ में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपने मुख्यालय सूरत से स्थानांतरित कर यहां मुंबई में स्थापित किये। और अंततः नगर बंबई प्रेसीडेंसी का मुख्यालय बन गया।

[[चित्|thumb|गेटवे ऑफ इंडिया को २ दिसम्बर,१९११ को भारत में सम्राट जॉर्ज पंचम व महारानी मैरी के आगमन पर स्वागत हेतु बनाया गया, जो कि ४ दिसम्बर, १९२४ को पूरा हुआ।]]

सन १८१७ के बाद, नगर को वृहत पैमाने पर सिविल कार्यों द्वारा पुनर्ओद्धार किया गया। इसमें सभी द्वीपों को एक जुड़े हुए द्वीप में जोडने की परियोजना मुख्य थी। इस परियोजना को हॉर्नबाय वेल्लार्ड कहा गया, जो १८४५ में पूर्ण हुआ, तथा पूरा ४३८bsp;कि॰मी॰² निकला। सन १८५३ में, भारत की प्रथम यात्री रेलवे लाइन स्थापित हुई, जिसने मुंबई को ठाणे से जोड़ा। अमरीकी नागर युद्ध के दौरान, यह नगर विश्व का प्रमुख सूती व्यवसाय बाजार बना, जिससे इसकी अर्थ व्यवस्था मजबूत हुई, साथ ही नगर का स्तर कई गुणा उठा।

१८६९ में स्वेज नहर के खुलने के बाद से, यह अरब सागर का सबसे बड़ा पत्तन बन गया।[18] अगले तीस वर्षों में, नगर एक प्रधान नागरिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। यह विकास संरचना के विकास एवं विभिन्न संस्थानों के निर्माण से परिपूर्ण था। १९०६ तक नगर की जनसंख्या दस लाख बिलियन के लगभग हो गयी थी। अब यह भारत की तत्कालीन राजधानी कलकत्ता के बाद भारत में, दूसरे स्थान सबसे बड़ा शहर था। बंबई प्रेसीडेंसी की राजधानी के रूप में, यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का आधार बना रहा। मुंबई में इस संग्राम की प्रमुख घटना १९४२ में महात्मा गाँधी द्वारा छेड़ा गया भारत छोड़ो आंदोलन था। १९४७ में भारतीय स्वतंत्रता के उपरांत, यह बॉम्बे राज्य की राजधानी बना। १९५० में उत्तरी ओर स्थित सैल्सेट द्वीप के भागों को मिलाते हुए, यह नगर अपनी वर्तमान सीमाओं तक पहुंचा।

१९५५ के बाद, जब बॉम्बे राज्य को पुनर्व्यवस्थित किया गया और भाषा के आधार पर इसे महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में बांटा गया, एक मांग उठी, कि नगर को एक स्वायत्त नगर-राज्य का दर्जा दिया जाये। हालांकि संयुक्त महाराष्ट्र समिति के आंदोलन में इसका भरपूर विरोध हुआ, व मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने पर जोर दिया गया। इन विरोधों के चलते, १०५ लोग पुलिस गोलीबारी में मारे भी गये और अन्ततः १ मई, १९६० को महाराष्ट्र राज्य स्थापित हुआ, जिसकी राजधानी मुंबई को बनाया गया।

१९७० के दशक के अंत तक, यहां के निर्माण में एक सहसावृद्धि हुई, जिसने यहां आवक प्रवासियों की संख्या को एक बड़े अंक तक पहुंचाया। इससे मुंबई ने कलकत्ता को जनसंख्या में पछाड़ दिया, व प्रथम स्थान लिया। इस अंतःप्रवाह ने स्थानीय मराठी लोगों के अंदर एक चिंता जगा दी, जो कि अपनी संस्कृति, व्यवसाय, भाषा के खोने से आशंकित थे।[19]बाला साहेब ठाकरे द्वारा शिव सेना पार्टी बनायी गयी, जो मराठियों के हित की रक्षा करने हेतु बनी थी।[20] नगर का धर्म-निरपेक्ष सूत्र १९९२-९३ के दंगों के कारण छिन्न-भिन्न हो गया, जिसमें बड़े पैमाने पर जान व माल का नुकसान हुआ। इसके कुछ ही महीनों बाद १२ मार्च,१९९३ को शृंखलाबद्ध बम विस्फोटों ने नगर को दहला दिया। इनमें पुरे मुंबई में सैंकडों लोग मारे गये। १९९५ में नगर का पुनर्नामकरण मुंबई के रूप में हुआ। यह शिवसेना सरकार की ब्रिटिश कालीन नामों के ऐतिहासिक व स्थानीय आधार पर पुनर्नामकरण नीति के तहत हुआ। यहां हाल के वर्षों में भी इस्लामी उग्रवादियों द्वारा आतंकवादी हमले हुए। २००६ में यहां ट्रेन विस्फोट हुए, जिनमें दो सौ से अधिक लोग मारे गये, जब कई बम मुंबई की लोकल ट्रेनों में फटे।[21]

भूगोल[संपादित करें]

मुंबई शहर भारत के पश्चिमी तट पर कोंकण तटीय क्षेत्र में उल्हास नदी के मुहाने पर स्थित है। इसमें सैलसेट द्वीप का आंशिक भाग है और शेष भाग ठाणे जिले में आते हैं। अधिकांश नगर समुद्रतल से जरा ही ऊंचा है, जिसकी औसत ऊंचाई 10 मी॰ (33 फीट) से 15 मी॰ (49 फीट) के बीच है। उत्तरी मुंबई का क्षेत्र पहाड़ी है, जिसका सर्वोच्च स्थान 450 मी॰ (1,476 फीट) पर है।[22] नगर का कुल क्षेत्रफल ६०३ कि.मी² (२३३ sq mi) है।

संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान नगर के समीप ही स्थित है। यह कुल शहरी क्षेत्र के लगभग छठवें भाग में बना हुआ है। इस उद्यान में तेंदुए इत्यादि पशु अभी भी मिल जाते हैं,[23][24] जबकि जातियों का विलुप्तीकरण तथा नगर में आवास की समस्या सर उठाये खड़ी है।

भाटसा बांध के अलावा, ६ मुख्य झीलें नगर की जलापूर्ति करतीं हैं: विहार झील, वैतर्णा, अपर वैतर्णा, तुलसी, तंस व पोवई। तुलसी एवं विहार झील बोरिवली राष्ट्रीय उद्यान में शहर की नगरपालिका सीमा के भीतर स्थित हैं। पोवई झील से केवल औद्योगिक जलापुर्ति की जाती है। तीन छोटी नदियां दहिसर, पोइसर एवं ओहिवाड़ा (या ओशीवाड़ा) उद्यान के भीतर से निकलतीं हैं, जबकि मीठी नदी, तुलसी झील से निकलती है और विहार व पोवई झीलों का बढ़ा हुआ जल ले लेती है। नगर की तटरेखा बहुत अधिक निवेशिकाओं (संकरी खाड़ियों) से भरी है। सैलसेट द्वीप की पूर्वी ओर दलदली इलाका है, जो जैवभिन्नताओं से परिपूर्ण है। पश्चिमी छोर अधिकतर रेतीला या पथरीला है।

मुंबई की अरब सागर से समीपता के खारण शहरी क्षेत्र में मुख्यतः रेतीली बालू ही मिलती है। उपनगरीय क्षेत्रों में, मिट्टी अधिकतर अल्युवियल एवं ढेलेदार है। इस क्षेत्र के नीचे के पत्थर काले दक्खिन बेसाल्ट व उनके क्षारीय व अम्लीय परिवर्तन हैं। ये अंतिम क्रेटेशियस एवं आरंभिक इयोसीन काल के हैं। मुंबई सीज़्मिक एक्टिव (भूकम्प सक्रिय) ज़ोन है।[25] जिसके कारण इस क्षेत्र में तीन सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं। इस क्षेत्र को तृतीय श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है, कि रिक्टर पैमाने पर 6.5 तीव्रता के भूकम्प आ सकते हैं।

जलवायु[संपादित करें]

मुख्य लेख : मुंबई की जलवायु

उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में अरब सागर के निकट स्थित मुंबई की जलवायु में दो मुख्य ऋतुएं हैं: शुष्क एवं आर्द्र ऋतु। आर्द्र ऋतु मार्च एवं अक्टूबर के बीच आती है। इसका मुख्य लक्षण है उच्च आर्द्रता व तापमन लगभग 30 °से. (86 °फ़ै) से भी अधिक। जून से सितंबर के बीच मानसून वर्षाएं नगर भिगोतीं हैं, जिससे मुंबई का वार्षिक वर्षा स्तर 2,200 मिलीमीटर (86.6 इंच) तक पहुंचता है। अधिकतम अंकित वार्षिक वर्षा १९५४ में 3,452 मिलीमीटर (135.9 इंच) थी।[26] मुंबई में दर्ज एक दिन में सर्वोच्च वर्षा 944 मिलीमीटर (37.17 इंच) २६ जुलाई,२००५ को हुयी थी।[27]नवंबर से फरवरी तक शुष्क मौसम रहता है, जिसमें मध्यम आर्द्रता स्तर बना रहता है, व हल्का गर्म से हल्का ठंडा मौसम रहता है। जनवरी से फरवरी तक हल्की ठंड पड़ती है, जो यहां आने वाली ठंडी उत्तरी हवाओं के कारण होती है।

मुंबई का वार्षिक तापमान उच्चतम 38 °से. (100 °फ़ै) से न्यूनतम 11 °से. (52 °फ़ै)तक रहता है। अब तक का रिकॉर्ड सर्वोच्च तापमान 43.3 °से. (109.9 °फ़ै) तथा २२ जनवरी,१९६२ को नयूनतम 7.4 °से. (45.3 °फ़ै) रहा।[28]। हालांकि 7.4 °से. (45.3 °फ़ै) यहां के मौसम विभाग के दो में से एक स्टेशन द्वारा अंकित न्यूनतम तापमान कन्हेरी गुफाएं के निकट नगर की सीमाओं के भीतर स्थित स्टेशन द्वारा न्यूनतम तापमान ८ फरवरी,२००८ को 6.5 °से. (43.7 °फ़ै) अंकित किया गया।[29]

अर्थ-व्यवस्था[संपादित करें]

मुख्य लेख : मुंबई की अर्थ व्यवस्था

मुंबई भारत की सबसे बड़ी नगरी है। यह देश की एक महत्वपूर्ण आर्थिक केन्द्र भी है, जो सभी फैक्ट्री रोजगारों का १०%, सभी आयकर संग्रह का ४०%, सभी सीमा शुल्क का ६०%, केन्द्रीय राजस्व का २०% व भारत के विदेश व्यापार एवं 40 बिलियन (US$580 मिलियन) निगमित करों से योगदान देती है।[30] मुंबई की प्रति-व्यक्ति आय 48,954 (US$710) है, जो राष्ट्रीय औसत आय की लगभग तीन गुणा है।[31] भारत के कई बड़े उद्योग (भारतीय स्टेट बैंक, टाटा ग्रुप, गोदरेज एवं रिलायंस सहित) तथा चार फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियां भी मुंबई में स्थित हैं। कई विदेशी बैंक तथा संस्थानों की भी शाखाएं यहां के विश्व व्यापार केंद्र क्षेत्र में स्थित हैं।[32] सन १९८० तक, मुंबई अपने कपड़ा उद्योग व पत्तन के कारण संपन्नता अर्जित करता था, किन्तु स्थानीय अर्थ-व्यवस्था तब से अब तक कई गुणा सुधर गई है, जिसमें अब अभियांत्रिकी, रत्न व्यवसाय, हैल्थ-केयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी भी सम्मिलित हैं। मुंबई में ही भाभा आण्विक अनुसंधान केंद्र भी स्थित है। यहीं भारत के अधिकांश विशिष्ट तकनीकी उद्योग स्थित हैं, जिनके पास आधुनिक औद्योगिक आधार संरचना के साथ ही अपार मात्रा में कुशल मानव संसाधन भी हैं। आर्थिक कंपनियों के उभरते सितारे, ऐयरोस्पेस, ऑप्टिकल इंजीनियरिंग, सभी प्रकार के कम्प्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जलपोत उद्योग तथा पुनर्नवीनीकृत ऊर्जा स्रोत तथा शक्ति-उद्योग यहां अपना अलग स्थान रखते हैं।

नगर के कार्यक्षेत्र का एक बड़ा भाग केन्द्र एवं राज्य सरकारी कर्मचारी बनाते हैं। मुंबई में एक बड़ी मात्रा में कुशल तथा अकुशल व अर्ध-कुशल श्रमिकों की शक्ति है, जो प्राथमिकता से अपना जीवन यापन टैक्सी-चालक, फेरीवाले, यांत्रिक व अन्य ब्लू कॉलर कार्यों से करते हैं। पत्तन व जहाजरानी उद्योग भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ढ़ेरों कर्मचारियों को रोजगार देता है। नगर के धारावी क्षेत्र में, यहां का कूड़ा पुनर्चक्रण उद्योग स्थापित है। इस जिले में अनुमानित १५,००० एक-कमरा फैक्ट्रियां हैं।[33]

मीडिया उद्योग भी यहां का एक बड़ा नियोक्ता है। भारत के प्रधान दूरदर्शन व उपग्रह तंत्रजाल (नेटवर्क), व मुख्य प्रकाशन गृह यहीं से चलते हैं। हिन्दी चलचित्र उद्योग का केन्द्र भी यहीं स्थित है, जिससे प्रति वर्ष विश्व की सर्वाधिक फिल्में रिलीज़ होती हैं। बॉलीवुड शब्द बाँम्बे व हॉलीवुड को मिलाकर निर्मित है। मराठी दूरदर्शन एवं मराठी फिल्म उद्योग भी मुंबई में ही स्थित है।

शेष भारत की तरह, इसकी वाणिज्यिक राजधानी मुंबई ने भी १९९१ के सरकारी उदारीकरण नीति के चलते आर्थिक उछाल (सहसावृद्धि) को देखा है। इसके साथ ही १९९० के मध्य दशक में सूचना प्रौद्योगिकी, निर्यात, सेवाएं व बी पी ओ उद्योगों में भी उत्थान देखा है। मुंबई का मध्यम-वर्गीय नागरिक जहां इस उछाल से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है वहीं वो इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप उपभोक्ता उछाल का कर्ता भी है। इन लोगों की ऊपरावर्ती गतिशीलता ने उपभोक्तओं के जीवन स्तर व व्यय क्षमता को भी उछाला है। मुंबई को वित्तीय बहाव के आधार पर मास्टरकार्ड वर्ल्डवाइड के एक सर्वेक्षण में; विश्व के दस सर्वोच्च वाणिज्य केन्द्रों में से एक गिना गया है।[5]

नगर प्रशासन[संपादित करें]

मुख्य लेख : बृहन्मुंबई नगरमहापालिका

मुंबई में दो पृथक क्षेत्र हैं: नगर एवं उपनगर, यही महाराष्ट्र के दो जिले भी बनाते हैं। शहरी क्षेत्र को प्रायः द्वीप नगर या आइलैण्ड सिटी कहा जाता है।[34] नगर का प्रशासन बृहन्मुंबई नगर निगम (बी एम सी) (पूर्व बंबई नगर निगम) के अधीन है, जिसकी कार्यपालक अधिकार नगर निगम आयुक्त, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक आई ए एस अधिकारी को दिये गए हैं। निगम में 227 पार्षद हैं, जो 24 नगर निगम वार्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं, पाँच नामांकित पार्षद व एक महापौर हैं। निगम नागरिक सुविधाओं एवं शहर की अवसंरचना आवश्यकताओं के लिए प्रभारी है। एक सहायक निगम आयुक्त प्रत्येक वार्ड का प्रशासन देखता है। पार्षदों के चुनाव हेतु, लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां अपने प्रत्याशि खड़े करतीं हैं। मुंबई महानगरीय क्षेत्र में 7 नगर निगम व 13 नगर परिषद हैं। बी एम सी के अलावा, यहां ठाणे, कल्याण-डोंभीवली, नवी मुंबई, मीरा भयंदर, भिवंडी-निज़ामपुर एवं उल्हासनगर की नगरमहापालिकाएं व नगरपालिकाएं हैं।[35]

ग्रेटर मुंबई में महाराष्ट्र के दो जिले बनते हैं, प्रत्येक का एक जिलाध्यक्ष है। जिलाध्यक्ष जिले की सम्पत्ति लेख, केंद्र सरकार के राजस्व संग्रहण के लिए उत्तरदायी होता है। इसके साथ ही वह शहर में होने वाले चुनावों पर भी नज़र रखता है।

मुंबई पुलिस का अध्यक्ष पुलिस आयुक्त होता है, जो आई पी एस अधिकारी होता है। मुंबई पुलिस राज्य गृह मंत्रालय के अधीन आती है। नगर सात पुलिस ज़ोन व सत्रह यातायात पुलिस ज़ोन में बंटा हुआ है, जिनमें से प्रत्येक का एक पुलिस उपायुक्त है। यातायात पुलिस मुंबई पुलिस के अधीन एक स्वायत्त संस्था है।[36]मुंबई अग्निशमन दल विभाग का अध्यक्ष एक मुख्य फायर अधिकारी होता है, जिसके अधीन चार उप मुख्य फायर अधिकारी व छः मंडलीय अधिकारी होते हैं।

मुंबई में ही बंबई उच्च न्यायालय स्थित है, जिसके अधिकार-क्षेत्र में महाराष्ट्र, गोआ राज्य एवं दमन एवं दीव तथा दादरा एवं नागर हवेली के केंद्र शासित प्रदेश भी आते हैं। मुंबई में दो निम्न न्यायालय भी हैं, स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट –नागरिक मामलों हेतु, व विशेष टाडा (टेररिस्ट एण्ड डिस्रप्टिव एक्टिविटीज़) न्यायालय –जहां आतंकवादियों व फैलाने वालों व विध्वंसक प्रवृत्ति व गतिविधियों में पहड़े गए लोगों पर मुकदमें चलाए जाते हैं।

शहर में लोक सभा की छः व महाराष्ट्र विधान सभा की चौंतीस सीटें हैं। मुंबई की महापौर शुभा रावल हैं, नगर निगम आयुक्त हैं जयराज फाटाक एवं शेर्रिफ हैं इंदु साहनी।

यातायात[संपादित करें]

मुंबई के अधिकांश निवासी अपने आवास व कार्याक्षेत्र के बीच आवागमन के लिए कोल यातायात पर निर्भर हैं। मुंबई के यातायात में मुंबई उपनगरीय रेलवे, बृहन्मुंबई विद्युत आपूर्ति एवं यातायात की बसें, टैक्सी ऑटोरिक्शा, फेरी सेवा आतीं हैं। यह शहर भारतीय रेल के दो मंडलों का मुख्यालय है: मध्य रेलवे (सेंट्रल रेलवे), जिसका मुख्यालय छत्रपति शिवाजी टर्मिनस है, एवं पश्चिम रेलवे, जिसका मुख्यालय चर्चगेट के निकट स्थित है। नगर यातायात की रीढ़ है मुंबई उपनगरीय रेल, जो तीन भिन्न नेटव्र्कों से बनी है, जिनके रूट शहर की लम्बाई में उत्तर-दक्षिण दिशा में दौड़ते हैं। मुंबई मैट्रो, एक भूमिगत एवं उत्थित स्तरीय रेलवे प्रणाली, जो फिल्हाल निर्माणाधीन है, वर्सोवा से अंधेरी होकर घाटकोपर तक प्रथम चरण में 2009 तक चालू होगी।

मुंबई भारत के अन्य भागों से भारतीय रेल द्वारा व्यवस्थित ढंग से जुड़ा है। रेलगाड़ियां छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, दादर, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस एवं अंधेरी से आरंभ या समाप्त होती हैं। मुंबई उपनगरीय रेल प्रणाली 6.3 मिलियन यात्रियों को प्रतिदिन लाती ले जाती है।[37]

बी ई एस टी द्वारा चालित बसें, लगभग नगर के हरेक भाग को यातायात उपलब्ध करातीं हैं। साथ ही नवी मुंबई एवं ठाणे के भी भाग तक जातीं हैं। बसें छोटी से मध्यम दूरी तक के सफर के लिए प्रयोगनीय हैं, जबकि ट्रेनें लम्बी दूरियों के लिए सस्ता यातायात उपलब्ध करातीं हैं। बेस्ट के अधीन लगभग 3,408 बसें चलतीं हैं,[38] जो प्रतिदिन लगभग 4.5 मिलियन यात्रियों को 340 बस-रूटों पर लाती ले जातीं हैं। इसके बेड़े में सिंगल-डेकर, डबल-डेकर, वेस्टीब्यूल, लो-फ्लोर, डिसेबल्ड फ्रेंड्ली, वातानुकूलित एवं हाल ही में जुड़ीं यूरो-तीन सम्मत सी एन जी चालित बसें सम्मिलित हैं। महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एम एस आर टी सी) की अन्तर्शहरीय यातायात सेवा है, जो मुंबई को राज्य व अन्य राज्यों के शहरों से जोड़तीं हैं। मुंबई दर्शन सेवा के द्वारा पर्यटक यहां के स्थानीय पर्यटन स्थलों का एक दिवसीय दौरा कर सकते हैं।

काली व पीली, मीटर-युक्त टैसी सेवा पूरे शहर में उपलब्ध है। मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों में ऑटोरिक्शा उपलब्ध हैं, जो सी एन जी चालित हैं, व भाड़े पर चलते हैं। ये तिपहिया सवारी जाने आने का उपयुक्त साधन हैं। ये भाड़े के यातायात का सबसे सस्ता जरिया हैं, व इनमें तीन सवारियां बैठ सकतीं हैं।

मुंबई का छत्रपति शिवाजी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र (पूर्व सहर अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र) दक्षिण एशिया का व्यस्ततम हवाई अड्डा है।[39]जूहू विमानक्षेत्र भारत का प्रथम विमानक्षेत्र है, जिसमें फ्लाइंग क्लब व एक हैलीपोर्ट भी हैं। प्रस्तावित नवी मुंबई अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, जो कोपरा-पन्वेल क्षेत्र में बनना है, को सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, पूरा होने पर, वर्तमान हवाई अड्डे का भार काफी हद तक कम कर देगा। मुंबई में देश के 25% अन्तर्देशीय व 38% अन्तर्राष्ट्रीय यात्री यातायात सम्पन्न होता है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, मुंबई में विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक पत्तन उपलब्ध हैं। यहां से ही देश के यात्री व कार्गो का 50% आवागमन होता है।[6] यह भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण बेस भी है, क्योंकि यहां पश्चिमी नौसैनिक कमान भी स्थित है।[40] फैरी भी द्वीपों आदि के लिए उपलब्ध हैं, जो कि द्वीपों व तटीय स्थलों पर जाने का एक सस्ता जरिया हैं।

उपयोगिता सेवाएं[संपादित करें]

बी एम सी शहर की पेय जलापूर्ति करता है। इस जल का अधिकांश भाग तुलसी एवं विहार झील से तथा कुछ अन्य उत्तरी झीलों से आता है। यह जल भाण्डुप एशिया के सबसे बड़े जल-शोधन संयंत्र में में शोधित कर आपूर्ति के लिए उपलब्ध कराया जाता है। भारत की प्रथम भूमिगत जल-सुरंग भी मुंबई में ही बनने वाली है।[41]बी एम सी ही शहर की सड़क रखरखाव और कूड़ा प्रबंधन भी देखता है। प्रतिदिन शहर का लगभग ७८०० मीट्रिक टन कूड़ा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मुलुंड, उत्तर-पश्चिम में गोराई और पूर्व में देवनार में डम्प किया जाता है। सीवेज ट्रीटमेंट वर्ली और बांद्रा में कर सागर में निष्कासित किया जाता है।

मुंबई शहर में विद्युत आपूर्ति बेस्ट, रिलायंस एनर्जी, टाटा पावर और महावितरण (महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लि.) करते हैं। यहां की अधिकांश आपूर्ति जल-विद्युत और नाभिकीय शक्ति से होती है। शहर की विद्युत खपत उत्पादन क्षमता को पछाड़ती जा रही है। शहर का सबसे बड़ा दूरभाष सेवा प्रदाता एम टी एन एल है। इसकी २००० तक लैंडलाइन और सेल्युलर सेवा पर मोनोपॉली थी। आज यहां मोबाइल सेवा प्रदाताओं में एयरटेल, वोडाफोन, एम टी एन एल, बी पी एल, रिलायंस कम्युनिकेशंस और टाटा इंडिकॉम हैं। शहर में जी एस एम और सी डी एम ए सेवाएं, दोनों ही उपलब्ध हैं। एम टी एन एल एवं टाटा यहां ब्रॉडबैंड सेवा भी उपलब्ध कराते हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

जनसंख्या बढ़वार
जनगणनाजनसंख्या %±
१९७१59,70,575
१९८१82,43,40538.1%
१९९१99,25,89120.4%
२००१1,19,14,39820.0%
स्रोत: मुंबई महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA)[42]
आंकड़े भारत सरकार की जनगणना पर आधारित हैं।

२००१ की जनगणना अनुसार मुंबई की जनसंख्या ११,९१४,३९८ थी।[43] वर्ल्ड गैज़ेटियर द्वारा २००८ में किये गये गणना कार्यक्रम के अनुसार मुंबई की जनसंख्या १३,६६२,८८५ थी।[44] तभी मुंबई महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या २१,३४७,४१२ थी।[45] यहां की जनसंख्या घनत्व २२,००० व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। २००१ की जनगणना अनुसार बी.एम.सी के प्रशासनाधीन ग्रेटर मुंबई क्षेत्र की साक्षरता दर ७७.४५% थी,[46] जो राष्ट्रीय औसत ६४.८% से अधिक थी।[47] यहां का लिंग अनुपात ७७४ स्त्रियां प्रति १००० पुरुष द्वीपीय क्षेत्र में, ८२६ उपनगरीय क्षेत्र और ८११ ग्रेटर मुंबई में,[46] जो आंकड़े सभी राष्ट्रीय औसत अनुपात ९३३ से नीचे हैं।[48] यह निम्नतर लिंग अनुपात बड़ी संख्या में रोजगार हेतु आये प्रवासी पुरुषों के कारण है, जो अपने परिवार को अपने मूल स्थान में ही छोड़कर आते हैं।[49]

मुंबई में ६७.३९% हिन्दू, १८.५६% मुस्लिम, ३.९९% जैन और ३.७२% ईसाई लोग हैं। इनमें शेष जनता सिख और पारसीयों की है।[50][51] मुंबई में पुरातनतम, मुस्लिम संप्रदाय में दाउदी बोहरे, खोजे और कोंकणी मुस्लिम हैं।[52] स्थानीय ईसाइयों में ईस्ट इंडियन कैथोलिक्स हैं, जिनका धर्मांतरण पुर्तगालियों ने १६वीं शताब्दी में किया था।[53] शहर की जनसंख्या का एक छोटा अंश इज़्राइली बेने यहूदी और पारसीयों का भी है, जो लगभग १६०० वर्ष पूर्व यहां फारस की खाड़ी या यमन से आये थे।[54]

मुंबई में भारत के किसी भी महानगर की अपेक्षा सबसे अधिक बहुभाषियों की संख्या है।महाराष्ट्र राज्य की आधिकारिक राजभाषा मराठी है। अन्य बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी और अंग्रेज़ी हैं।[55] एक सर्वसाधारण की बोलचाल की निम्न-स्तरीय भाषा है बम्बइया हिन्दी जिसमें अधिकांश शब्द और व्याकरण तो हिन्दी का ही है, किंतु इसके अलावा मराठी और अंग्रेज़ी के शब्द भी हैं। इसके अलावा कुछ शब्द यही अविष्कृत हैं। मुंबई के लोग अपने ऑफ को मुंबईकर या मुंबैयाइट्स कहलाते हैं। उच्चस्तरीय व्यावसाय में संलग्न लोगों द्वारा अंग्रेज़ी को वरीयता दी जाती है।

मुंबई में भी तीव्र गति से शहरीकरण को अग्रसर विकसित देशों के शहरों द्वारा देखी जारही प्रधान शहरीकरण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इनमें गरीबी, बेरोजगारी, गिरता जन-स्वास्थ्य और अशिक्षा/असाक्षरता प्रमुख हैं। यहां की भूमि के मूल्य इतने ऊंचे हो गये हैं, कि लोगों को निम्नस्तरीय क्षेत्रों में अपने व्यवसाय स्थल से बहुत दूर रहना पड़ता है। इस कारण सड़कों पर यातायात जाम और लोक-परिवहन आदि में अत्यधिक भीड़ बढ़ती ही जा रही हैं। मुंबई की कुल जनसंख्या का लगभग ६०% अंश गंदी बस्तियों और झुग्गियों में बसता है।[56]धारावी, एशिया की दूसरी सबसे बड़ी स्लम-बस्त्ती[57] मध्य मुंबई में स्थित है, जिसमें ८ लाख लोग रहते हैं।[58] ये स्लम भी मुंबई के पर्यटक आकर्षण बनते जा रहे हैं।[59][60][61] मुंबई में प्रवारियों की संख्या १९९१-२००१ में ११.२ लाख थी, जो मुंबई की जनसंख्या में कुल बढ़त का ५४.८% है।[62] २००७ में मुंबई की अपराध दर (भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दर्ज अपराध) १८६.२ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो राष्ट्रीय औसत १७५.१ से कुछ ही अधिक है, किंतु भारत के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर सूची के अन्य शहरों की औसत दर ३१२.३ से बहुत नीचे है।[63] शहर की मुख्य जेल अर्थर रोड जेल है।

संस्कृति[संपादित करें]

मुख्य लेख : मुंबई की संस्कृति

मुंबई की संस्कृति परंपरागत उत्सवों, खानपान, संगीत, नृत्य और रंगमंच का सम्मिश्रण है। इस शहर में विश्व की अन्य राजधानियों की अपेक्षा बहुभाषी और बहुआयामी जीवनशैली देखने को मिलती है, जिसमें विस्तृत खानपान, मनोरंजन और रात्रि की रौनक भी शामिल है।[64] मुंबई के इतिहास में यह मुख्यतः एक प्रधान व्यापारिक केन्द्र रहा है। इस खारण विभिन्न क्षेत्रों के लोग यहां आते रहे, जिससे बहुत सी संस्कृतियां, धर्म, आदि यहां एकसाथ मिलजुलकर रहते हैं।[51]

मुंबई भारतीय चलचित्र का जन्मस्थान है।[65]—दादा साहेब फाल्के ने यहां मूक चलचित्र के द्वारा इस उद्योग की स्थापना की थी। इसके भाद ही यहां मराठी चलचित्र का भी श्रीगणेश हुआ था। तब आरंभिक बीसवीं शताब्दी में यहां सबसे पुरानी फिल्म प्रसारित हुयी थी।[66] मुंबई में बड़ी संख्या में सिनेमा हॉल भी हैं, जो हिन्दी, मराठी और अंग्रेज़ी फिल्में दिखाते हैं। विश्व में सबसे बड़ा IMAX डोम रंगमंच भी मुंबई में वडाला में ही स्थित है।[67] मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव[68] और फिल्मफेयर पुरस्कार की वितरण कार्यक्रम सभा मुंबाई में ही आयोजित होती हैं।[69] हालांकि मुंबई के ब्रिटिश राज में स्थापित अधिकांश रंगमंच समूह १९५० के बाद भंग हो चुके हैं, फिर भी मुंबई में एक समृद्ध रंगमंच संस्कृति विकसित हुयी हुई है। ये मराठी और अंग्रेज़ी, तीनों भाषाओं के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी विकसित है।[70][71]

यहां कला-प्रेमियों की कमी भी नहीं है। अनेक निजी व्यावसायिक एवं सरकारी कला-दीर्घाएं खुली हुई हैं। इनमें जहांगीर कला दीर्घा और राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय प्रमुख हैं। १८३३ में बनी बंबई एशियाटिक सोसाइटी में शहर का पुरातनतम पुस्तकालय स्थित है।[72]छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय (पूर्व प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूज़ियम) दक्षिण मुंबई का प्रसिद्ध संग्रहालय है, जहां भारतीय इतिहास के अनेक संग्रह सुरक्षित हैं।[73] मुंबई के चिड़ियाघर का नाम जीजामाता उद्यान है (पूर्व नाम: विक्टोरिया गार्डन्स), जिसमें एक हरा भरा उद्यान भी है।[74] नगर की साहित्य में संपन्नता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति तब मिली जब सलमान रुश्दी और अरविंद अडिग को मैन बुकर पुरस्कार मिले थे।[75] यही के निवासी रुडयार्ड किपलिंग को १९०७ में नोबल पुरस्कार भी मिला था।[76]मराठी साहित्य भी समय की गति क साथ साथ आधुनिक हो चुका है। यह मुंबई के लेखकों जैसे मोहन आप्टे, अनन्त आत्माराम काणेकर और बाल गंगाधर तिलक के कार्यों में सदा दृष्टिगोचर रहा है। इसको वार्षिक साहित्य अकादमी पुरस्कार से और प्रोत्साहन मिला है।[77]

मुंबई शहर की इमारतों में झलक्ता स्थापत्य, गोथिक स्थापत्य, इंडो रेनेनिक, आर्ट डेको और अन्य समकालीन स्थापत्य शैलियों का संगम है।[78]ब्रिटिश काल की अधिकांश इमारतें, जैसे विक्टोरिया टर्मिनस

यह महानगर मुंबई शहर, मुंबई उपनगर जिलों एवं नवी मुंबई तथा ठाणे शहरों को मिलाकर बनता है।
मुंबई में औसत तापमान एवं वर्षण (प्रैसिपिटेशन) की सारणी
कफे परेड मुंबई का महत्वपूर्ण व्यवसायिक केन्द्र है, जहां विश्व व्यापार केन्द्र स्थित है, व अन्य कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान भी हैं।
Since the 1970s, Mumbai has witnessed a construction boom and a significant influx of migrants, making it India's largest city

Mumbai tourist (visiting) place to visit list in hindi  मुंबई – एक  ऐसा  शहर,  जो  कभी  नहीं  सोता. यहाँ  सभी  अपनी  जिंदगी  की  गाड़ी  पर  दौड़  रहे  हैं  और  साथ  में  दौड़ता  हैं  ये  शहर  भी. सपनों  की  नगरी  कहे  जाने  वाले  मुम्बई शहर  में  जब  लोग  इस  आपा – धापी  से  भरी  जिंदगी  से  थक  जाते  हैं,  कुछ  देर  ठहर  कर,  रूककर  आराम  करना  चाहते  हैं, दिन  भर  की  चिलचिलाती  धूप  से  बचकर   सुनहरी  शाम  का  मज़ा  लेना   चाहते  हैं,  तो  वे  कहाँ  जाएँ? इस  एहसास  को  जीने  के  लिए, कहाँ  बिताएं  सुकून  के  दो  पल?? तब  याद  आती  हैं  मुंबई  की  ऐसी  कुछ  जगहें,  जहाँ  वे  शांति  से  बैठे,  कोई  सुकून  भरा  लम्हा  गुजारें.

आज  हम  मुंबई  की  कुछ  ऐसी  ही  जगहों  के  बारे  में  जानकारी  साझा  करेंगे,  जहाँ  मुम्बईवासी  और  अन्य  स्थानों  के  लोग  भी  घूमने  जाते  हैं  और  कई  सुनहरी  यादों  को  संजोते  हैं.

मुंबई के दर्शनीय स्थल की सूची

Mumbai tourist place to visit list in hindi

मुंबई  दर्शन  आप  पब्लिक  ट्रांसपोर्ट  की  मदद  से  भी कर सकते है. मुंबई में मुंबई दर्शन के लिए विशेष बस, टैक्सी चलती है, जो मुंबई के मुख्य स्थल को कवर करती है. मेरे हिसाब से मुंबई दर्शन के लिए इसकी बस सबसे अच्छी है. 7-8 घंटे में ये बस आपको मुंबई के बहुत से प्लेस दिखा देगी. साथ ही ये काफी किफायती होती है, 500-600 रुपय मे बड़ों को और 300-400 रुपय में बच्चों को ये मिल जाती है. ये बस मुंबई के अलग स्थान से मिल जाया करती है, लेकिन मुंबई के बीचों बीच के गेटवे ऑफ़ इंडिया में उपलब्ध होती है, जिसे बुक कर आप मुंबई दर्शन कर सकते है. मुंबई दर्शन के लिए टैक्सी भी होती है, लेकिन उनका खर्चा अधिक होता है.

  • गेट वे  ऑफ़  इंडिया (Gateway of India) : इसे   हमारे  देश  भारत  का  प्रवेश  द्वार  कहा  जाता  हैं.  यह  शहर  की  एक  अलग  ही  पहचान  कराता  हैं.  इसका  निर्माण  सन  1924  में  ब्रिटिश  राज  में  किया  गया  था.  इसके  निर्माण  का  उद्देश्य  ब्रिटिश  महाराज  जॉर्ज  वी  और  महारानी  मेरी  के  भारत  आगमन  पर  उनका  स्वागत  करने  का  था.  चूँकि  मुंबई  देश  के  प्रमुख  बंदरगाहों  में  से  एक  हैं,  इसीलिए  इसे  प्रवेश  द्वार  मानते  हुए,  इसे  गेट वे ऑफ़ इंडिया नाम दिया गया.  यह  ब्रिटिशों   के  महाराज  के  आगमन  पर  उनके  उत्कर्ष  का  प्रतिक  था.  गेट वे ऑफ़ इंडिया अपोलो  बन्दर  के  जल  क्षेत्र  के  सामने  बनाया  गया  हैं  और  आज  पूरे  विश्व  के  लोगों  के  लिए  सबसे  प्रसिद्ध  दर्शनीय  स्थलों  में  से  एक  हैं.

गेट वे ऑफ़ इंडिया के पास ही होटल ताज है, जो एक दर्शनीय स्थल से कम नहीं है. गेट वे ऑफ़ इंडिया से होटल ताज का व्यू देखने लायक होता है. इसे भी लोग देखने दूर दूर से जाते है. होटल ताज का निर्माण 1902 में जमशेद टाटा से कराया था. 2008 में आतंकवादीयों द्वारा 26/11 का हमला भी यही हुआ था.

  • हाजी अली  की  दरगाह (Haji Ali Dargah): यह  मुंबई  के  प्रसिद्ध  धार्मिक  स्थलों  में  से  एक  हैं.  यह  अरब  सागर  के  बीच  में  स्थित  हैं  और  किनारे  से  500  यार्ड्स  की  दूरी  पर  स्थित  हैं. यह  मुस्लिम  संत  पीर  हाजी  अली  शाह  बुखारी  की  दरगाह  हैं. यह  लगभग  400  साल  पुरानी  दरगाह  हैं, जो  हिन्दू – मुस्लिम  कलाकारी  का  उत्कृष्ट  उदाहरण  हैं. इस दरगाह की मुख्य बात यह है कि समुद्र के बीचों बीच होने के बावजूद यह कभी नहीं डूबती है. कहते है, बाबा के दरबार तक कभी भी पानी नहीं घुसा है.

इसके  अलावा  इस  बड़ी  सी  दरगाह  के  बाहर  स्वादिष्ट  पकवानों  के  अनेक  लोकल  स्टॉल  लगे  होते  हैं. साथ  ही  हाजी  अली  मुंबई  की  पश्चिम  लोकल   रेलवे – लाइन  का  प्रमुख  स्टॉप  हैं,  जिससे  लोगों  को  यहाँ  तक  पहुँचने  में  आसानी  होती  हैं.

  • जुहू बीच (Juhu beach) भारत  में  सबसे  बड़ी  और  सबसे  ज्यादा  देखी  जाने  वाली  बीचों  में  से  एक  हैं – जुहू  बीच. साथ  ही  यहाँ  पर  कई  प्रसिद्ध  हस्तियों और फ़िल्मी  दुनिया  के  चमकते  हुए  सितारों  के  घर  भी  हैं, इसलिए  भी  यह  बहुत  प्रसिद्ध  हैं  और  लोग   इन्हें  देखने  भी  यहाँ  जाते  हैं. इस  बीच  पर  मिलने  वाले  पकवानों  के  लिए  भी  कई  लोग यहाँ  दूर – दूर  से  आते  हैं. यहाँ की पाव भाजी, भेल, पानीपूरी जग प्रसिध्य है. यहाँ  बीच  पर  रेत  पर  घूमते  हुए  लोग  घुड़सवारी  का  मजा  लेते  हैं,  बंदरों  की  उछल – कूद  देखते  हैं,  बच्चे  खिलौनों  और  गुब्बारों  को   खरीदकर  उनसे  खेलने  में  खुश  होते  हैं  और  भी  कई  मनोरंजन  के  साधनों   से  लोग  यहाँ  अच्छा  समय  व्यतीत  करते  हैं.
  • मरीन ड्राइव (Marin drive) मरीन ड्राइव मुंबई का सबसे सुंदर स्थान में से एक है. इसकी  सुन्दरता  रात को तो देखते ही बनती है, गोलाई में बने मरीन ड्राइव की सड़कों में रात में जब स्ट्रीट लाइट जलती है, तो ऐसा लगता है मानों किसी रानी ने गले का हार पहना है. इसलिए इसे क्वीन नेकलेस भी कहते है. मरीन  ड्राइव  दक्षिणी  मुंबई  के  4 कि. मी.  के  क्षेत्र  में  फैला  हुआ  हैं. यह  मुंबई  की  सबसे  सुन्दर  सड़कों  में  से  एक  हैं. यह  रात  को  चमकती  हुई  रोशनी  में  बहुत  ही  मनमोहक  लगता  हैं.  शाम  के  समय  यह  बहुत  ही  सुन्दर  लगता  हैं  और  इसी  समय  इसे  देखने  का  आनंद  आता  हैं.  चाय  वाले  और  चाट  वाले  इस  जगह  को  सुन्दर  के  साथ – साथ  स्वाद – दार  भी  बना  देते  हैं. इसे लवर्स पॉइंट भी कहा जाता है. यहाँ के पत्थरों की आकृति देखते ही बनती है, जो मानव निर्मित है.
  • चौपाटी बीच(Girgaon chowpatty)मरीन  ड्राइव  के  पास   ही  चौपाटी  बीच  भी  हैं, जिसे गिरगांव चौपाटी के नाम से जाना जाता है. जहाँ  खानपान  के  शौक़ीन  लोगों  को  बहुत  ही  आनंद  आ  जाता  हैं. हाथ – गाड़ी पर  विभिन्न  स्वाद – दार  चीजें  बेचने  वाले  होते  हैं,  खिलौने  बेचने  वाले  होते  हैं  और  विभिन्न  मनोरंजन  के  साधन  होते  हैं.  यहाँ  की  भेलपुरी  और  पानी – पूरी  बहुत  प्रसिद्ध  हैं. यहाँ बग्गी का भी आनंद लिया जाता है.
  • एलिफेंटा केव [घारापुरीची  लेणी]मध्य  मुंबई  बंदरगाह  में  गेट  वे  ऑफ़  इंडिया  से  9  कि. मी.  की  दूरी  पर  एक  बहुत  ही   प्रसिद्ध  स्थल  हैं, जिसका  नाम  हैं – एलिफेंटा  केव. ये  पहाड़ों  को  काटकर  बनाया  गया  मंदिर  हैं. ये  भारत  के  सबसे  पेचीदा  और  खुबसूरत  नक्काशी  को  पेश  करने  वाले  मंदिरों  में  से  एक   हैं.

एलिफेंटा  केव  में  स्थित  भगवान  शिव  का  मंदिर  बहुत  प्रसिद्ध  हैं.  इसमें  हॉल,  आँगन,  खम्बे  आदि  का  सुन्दर  निर्माण  देखने  को  मिलता  हैं,  यहाँ  त्रिमुखी  शिवजी  की  प्रतिमा  हैं,  जो  भगवान  शिव  को  संसार  का  रचयिता,  पालनकर्ता   और  संहारक  के  रूप  में  प्रस्तुत  करती  हैं.  यह  स्थान  मुंबई   के  अभूतपूर्व  सुन्दर  और  शांत  स्थानों  में  से  एक  हैं.

  • सिद्धिविनायक मंदिर(Siddhivinayak temple mumbai)मुंबई  में  स्थित  सिद्धिविनायक  मंदिर  हिन्दुओं  के  इष्ट,  प्रथम  पूज्य  भगवान  श्री  गणेशजी  का  प्रसिद्ध  मंदिर  हैं.  यहाँ  प्रतिदिन  हजारों  श्रद्धालु  आते  हैं.  इसमें  बहुत  ही  सुन्दर  निर्माण – कार्य  किया  गया  है. इसका  निर्माण  सन  1801  में  किया  गया  था.

कहा  जाता  हैं  कि  यहाँ  मांगी  हुई  मन्नत  हमेशा  पूरी  होती  हैं,  इसके  आकर्षण  का  यह  मुख्य  कारण  हैं.  कई  बड़ी  हस्तियाँ  भी  यहाँ  आकर  अपने  कार्य  में  सफलता  का  आशीर्वाद  मांगती  हैं.

  • एस्सल वर्ल्ड (essel world) : 90  के  दशक  से  एस्सल  वर्ल्ड  मुंबई  के  साथ – साथ  पूरे  देश  में  ख्याति  प्राप्त  थीम  पार्क  हैं. यह  मनोरंजन  का  बहुत  अच्छा  माध्यम  हैं.  इस  अम्यूजमेंट  पार्क  की  रोमांचक  राइड्स  यहाँ  का  आकर्षण – केंद्र  होती  हैं.  इस  पार्क  की  विशेषता  यह  हैं  कि  यहाँ  किसी  भी  आयु – वर्ग  का  व्यक्ति  जा  सकता  हैं  और  आनंद  ले  सकता  हैं.  यह  साल  के  365  दिन  खुला  रहता  हैं और  यही  कारण  हैं  कि  यह  प्रतिदिन  लगभग  10,000  लोगों  का  मनोरंजन  करता  हैं.
  • संजय गाँधी  नेशनल  पार्क : इसे  पहले  बोरीवली  नेशनल  पार्क  के  नाम  से  जाना  जाता  था. यह  मुंबई  की  उत्तर  दिशा  की  ओर  उपनगरीय  क्षेत्र  में  स्थित  हैं,  जहाँ  बड़े   स्तर  पर  वन्य  जीवन  का  संरक्षण  किया  जाता  हैं.  यह  देश  में  स्थित  अन्य  राष्ट्रीय  उद्यानों  की  तरह  बहुत  बड़ा  तो  नहीं  हैं,  परन्तु  यहाँ  जो  वन्य   प्राणियों  और  वन्य  जीवन  संरक्षण  का  काम  किया  जा  रहा  हैं,  वह  काबिल – ए – तारीफ  हैं  और  यही  इसकी  ओर  आकर्षण  का  कारण  हैं.  शहर  की  भाग – दौड़  भरी  जिंदगी  से  दूर  यहाँ  प्रकृति  के  बीच  समय  गुजरने  के  लिए  यह  उत्तम  स्थान  हैं.
  • माउन्ट मेरी  चर्च : यह  माउन्ट  मेरी  का  महामंदिर [Basilica] हैं.  यह  एक  रोमन  केथोलिक  चर्च  हैं,  जो  कि  मुंबई  के  बांद्रा  नामक  स्थान  पर  स्थित  हैं.  कहा  जाता  हैं  कि  इसका  निर्माण  सन  1760  में  किया  गया  था.  यहाँ  कुमारी  मेरी  का  जन्मोत्सव  प्रति  वर्ष  8  सितम्बर  के  पश्चात्  1  सप्ताह  तक  मनाया  जाता  हैं. इसे  आम  लोग ‘बांद्रा  फेयर’ के  नाम  सेजानते  हैं  और  यहाँ  आकार  इसका  आनंद   उठाते  हैं.
  • छत्रपति शिवाजी  महाराज  वास्तु  संग्रहालय [CSMVS]: यह  संग्रहालय  मुंबई  के  एम्. जी. रोड  पर  स्थित  हैं, जो की मरीन ड्राइव व होटल ताज से वाल्किंग डिस्टेंस पर है. इसकी  स्थापना  10  जनवरी,  1922  को  हुई  थी. इसका  भवन  मुग़लों,  मराठों  और  जैनों  के  भवनों  की  निर्माण  शैली  का  मिला – जुला  रूप  हैं,  जिसके  चारों  ओर  एक  बगीचा  हैं,  जो  खजूर  के  वृक्षों  और  फूलों  से  आच्छादित हैं. इस संग्रहालय में 3 फ्लोर है, जो भारत देश की पुरानी संस्कृति के बारे में लोगों को बताते है. यहाँ अंदर ऑडियो गाइड भी मिलता है, जिसे आप 40 रुपय में लेकर संग्रहालय के अंदर रखी वस्तुओं के बारे में विस्तार से सुन सकते है.
  • काला घोड़ा  कला  भवन [ Kala  Ghoda  Art  Precinct ]: यह  मुंबई  की  सांस्कृतिक  कलाओं  का  केंद्र  हैं. यह  किले  और  कोलाबा  के  बीच  दक्षिणी  मुंबई   में  स्थित  हैं. यह मुंबई  की  सबसे  अच्छी आर्ट गेलेरी और संग्रहालयों  में  से  एक  हैं.  हर  साल  फरवरी  में  काला  घोड़ा  असोसिएशन  9  दिन  का ‘काला  घोड़ा  कला  महोत्सव’ का  आयोजन  करती  हैं,  जो  बहुत  ही  आकर्षक  होता  हैं  और  कला  प्रेमी  जनता  इसे  देखने  जाती  हैं.
  • मुंबई के   बाजार : हम  सभी  जानते  हैं  कि  महिलाओं  को  शोपिंग  का  कितना  शौक  होता  हैं, मुंबई  स्ट्रीट  शोपिंग  के  लिए   बहुत  प्रसिद्ध  हैं.  यहाँ  बहुत  सी  चीजे  कम  दाम  और  अच्छी  गुणवत्ता  के  साथ  मिल  जाती  हैं.  इस  उद्देश्य  हेतु  सबसे  ज्यादा  नाम  कमाया  हैं चोर बाज़ार ने. कोलाबा  कोज़वे  यादगार  चीजों  के  लिए,  लिंकिंग  रोड  सस्ते  जूतों, कपड़ो और  चोर  बाज़ार  एंटीक  चीजों  को  खरीदने  के  लिए  प्रसिद्ध  हैं.
  • हेरिटेज बिल्डिंग्स : मुंबई  में  कई  मन्त्र – मुग्ध  और  आश्चर्य – चकित  कर  देने  वाली  इमारतें  हैं,  जो  अपनी  जटिल  और  मन – मोहक  निर्माण  के  लिए  जानी  जाती  हैं.  इनमे  से  कुछ  उदाहरण  के  तौर  पर  हैं – प्रिंस  ऑफ़  वेल्स  म्यूज़ियम,  विक्टोरिया  टर्मिनस  रेलवे  स्टेशन [CST],  बॉम्बे  हाई  कोर्ट,  आदि.  ये  सभी  लगभग  दक्षिणी   मुंबई  में  या  इसके  पास  स्थित  हैं.
  • बोलीवुड(film city) : मुंबई हिंदुस्तान  की  फिल्म  इंडस्ट्री  ‘ बोलीवुड ’का  केंद्र  हैं.  यहाँ  फिल्म  सिटी  हैं, यह  मुंबई  के  पश्चिमी  उपनगरीय  इलाके  में  गोरेगांव  में  स्थित  हैं,  जहाँ  विभिन्न  फिल्मो  और  सीरियलों  की  शूटिंग  चलती  रहती  हैं.  आप  वहाँ  जाकर  शूटिंग  देख  सकते  हैं  और  यहाँ  लगाये  गये  फिल्मों  के  सेट  देखने  के  लिए  भी  बहुत  से  लोग जाते  हैं.

इस  प्रकार  अगर  देखा  जाएँ  तो  मुंबई  में  घुमने  के  लिए  बहुत  सी  जगह  हैं,  जैसे -:

क्रमांकविविध  स्थलस्थलों  के  नाम
1.प्रसिद्ध  मंदिरश्री  सिद्धिविनायक  मंदिर,  मुम्बादेवी मंदिर,  महालक्ष्मी  मंदिर,  अफगान  चर्च,  बाबुलनाथ  मंदिर,  बाबु  अमीचंद  पनालाल  अदिश्वर्जी  जैन  मंदिर,  श्री  वालकेश्वर  मंदिर,  इस्कोन  मंदिर,  ग्लोबल  पेगोडा,  आदि.
2.प्रसिद्ध  अम्यूजमेंट  पार्कस्नो  वर्ल्ड,  एस्सल  वर्ल्ड,  वाटर  किंगडम,  कमला  नेहरु  पार्क,  इमेजिका  थीम  पार्क,  आदि.
3.प्रसिद्ध  बीचजुहू  बीच,  मड  आईलेंड,  अक्सा  बीच,  वर्सोवा  बीच,  गिर्गौम  चौपाटी  बीच,  मार्वे  बीच,  दादर  चौपाटी  बीच,  गोराई  बीच,  मनोरी  बीच,  आदि.
4.अन्य  दर्शनीय  स्थलहैंगिंग  गार्डन,  शिवाजी  पार्क,  फ़्लोरा  फाउंटेन,  RBI  मोनेटरी  म्यूज़ियम,  जोगर्स  पार्क,  महाकाली  केव्स,  मालाबार  हिल्स,  नरीमन  पॉइंट,  पवाई  लेक,  प्रियदर्शिनी  पार्क  एंड  स्पोर्ट्स  काम्प्लेक्स,  धोबी  घाट,  महालक्ष्मी   रेस  कोर्स,  मुंबई  पोर्ट  ट्रस्ट  गार्डन,  नेहरु  साइंस  सेंटर,  जिजामाता  उद्यान,  आदि.

मुंबई  के  दर्शनीय  स्थलों  की  सूची  बहुत  बड़ी  हैं. साथ  ही  आप  एक  बार  के  टूर  में  मुंबई  नहीं  घूम  पाते,  कुछ  न  कुछ  छुट  ही  जाता  हैं.  परन्तु  इस  माया – नगरी  की  बात  ही  निराली  हैं,  इसलिए  कहा  जाता  हैं  कि  जो  एक  बार  मुंबई  जाता  हैं,  वो  वहीँ  का  होकर  रह   जाता  हैं.

अन्य दार्शनिक स्थल के बारे में पढ़े:

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